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Friday, January 3, 2020

आखिर बीजेपी मोदी जी से ख़ुश क्यूँ नहीं है?Why BJP or RSS not haapy with Modi?


आखिर बीजेपी मोदी जी से ख़ुश क्यूँ नहीं है?

[अब्दुल मोईद अज़हरी]
भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी, जिन के मन की बात और वतन की बात के प्रोग्रामों में किसी भी तरह के सांप्रदायिक वक्तव्य, भेदभाव की भावना या अलगाववाद के विचार और प्रचार को निराधार किया जाता है। देश में शांति व्यवस्था बनाये रखने और किसी भी नागरिक के साथ अनैतिक व्यवहार का बर्ताव न किये जाने की वकालत भी वो करते हैं और उस का आदेश और निर्देश भी देते हैं।

लेकिन बीजेपी शासित राज्यों कि सरकारें, उन के मंत्री और पुलिस प्रशासन देश के प्रधानमंत्री की किसी भी बात को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं। NRC, CAA और NPR को लेकर देश भर में शांति प्रदर्शन हुए कहीं से भी पुलिसिया दमन और प्रशासनिक बर्बरता की ख़बरें इतनी नहीं आयी हैं जितनी कि बीजेपी शासित राज्यों से आ रही हैं। दंगाई भी इस मामले में माननीय प्रधानमंत्री जी को धोका और चकमा दे गए। जब प्रधानमंत्री ने दंगाइयों को कपडे से पहचानने की सलाह दी तो कमबख्तों ने वही कपड़े और ड्रेस ख़रीदने शुरू कर दिए। मानो ऐसा को कि मोदी ने कहा हो कि दंगा करना हो तो इस ड्रेस या इस ख़ास कपडे को पहन कर करना।
 अकेले बंगाल के एक दुकानदार के बयान के मुताबिक उस के यहाँ का वो ख़ास लिबास जिस की तरफ़ प्रधानमंत्री जी ने इशारा दिया था एक हफ्ते के अन्दर इतना बिका जितना कि साल भर में नहीं बिका था। हैरानी की बात यह है कि ख़रीदारों में बड़ी तादाद बीजेपी सदस्यों की थी।


राम रहीम के केस में कोर्ट ने आदेश दिया था कि बाबा के समर्थकों द्वारा देश की जितनी संपत्ति का नुकसान हुआ है उस का उसे राम रहीम की जायदाद से वसूला जायेगा। अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सोचा अब कोर्ट कचेहरी की क्या ज़रूरत है यूपी में हमारी सरकार है इसलिए उन्हों ने कहा की इस का बदला लिया जायेगा। यही नहीं बदला जिस से चाहेंगे उस से ले लेंगे। राह चले क्सिसी को भी पकड़ लिया। मारा पीटा जेल किया और नोटिस भी भेज दी।
हद तो यह है कुछ मृतकों के नाम भी नोटिस भेज दी है। इस से पहले भी बीजेपी के कुछ धुरंधर मुस्लिम महिलाओं को क़ब्र निकाल कर उन के साथ दुष्कर्म करने कि मंशा जाता चुके हैं इस लिए योगी जी ने भी नोटिस कब्रिस्तान को भेज दिया।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कहते थे कि पुलिस उन की सुनती ही नहीं यहाँ अभी योगी जी का बदला वाला बयान टीवी पर चला ही था कि यूपी में कारगिल युद्ध हो गया।
आन की आन में यूपी के दसियों जिलों में ऐसी गोलियां चलीं मानों अब देश का बॉर्डर कश्मीर नहीं यूपी हो। 20 के क़रीब लोगों को मार दिया गया। प्रदर्शन करने वालों कि ग़लती यह थी वह संविधान बचाने के लिए शांतपूर्ण प्रदर्शन करने निकले थे। उन्हें लग रहा था कि अभी देश का लोकतंत्र बचा हुआ और राज्य की सरकार हो या प्रशासन वह जनता की रक्षा के लिए वचन वद्ध है लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि इधर कुछ वर्षों से परिस्थितियां बदल गयी हैं। केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार है।
एक तो मौसम की ठण्ड ऊपर से ज़मीर और आत्मा की ठंडी, बस इसी लिए थोडा सा देश को जला दिया। सोशल मीडिया ने मोदी जी का बचाव किया और प्रदर्शनकारियों की भीड़ से बीजेपी, आरएसएस और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं की पहचान भी कर ली लेकिन पुलिस प्रशासन किसी भी तरह से मानने को तैयार ही नहीं और न ही राज्य की सरकार इसे गंभीरता से लेने को तैयार है।
यह सारा कुछ बीजेपी शासित राज्यों में ही अक्सर हो रहा है।
कुछ निराधारी लोग तो यह भी कह रहे हैं कि चूँकि मोदी जी के नए नेतृत्व में बीजेपी के कई पुराने नेता साइड लाइन हो गए तो जो कुछ हो रहा है उन की हाय लगी है।





Thursday, January 2, 2020

कांग्रेस की समस्या ख़ुद कांग्रेस है और हल भीThe Problem with Congress is the party and solution as well


कांग्रेस की समस्या ख़ुद कांग्रेस है और हल भी

[अब्दुल मोईद अज़हरी]
एक सीट पर गुज़ारा करने वाली भारतीय जनता पार्टी 303 सीटों पर केसरिया विजयी ध्वज फहराएगी किसी ने सोचा नहीं होगा। 414 का कीर्तिमान रचने वाली कांग्रेस पार्टी इतना लाचार व बेबस हो जायेगी इस का अंदाज़ा किसी के सपने में नहीं हुआ होगा। राहुल गाँधी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जीतने के बाद 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए इतना मुश्किल हो जायेगा कि महीनों इस पार्टी को अध्यक्ष तक नसीब न हो यह द्रश्य कांग्रेस के इतिहास में सब से अँधेरा दिन से याद किया जायेगा।
आज भी कांग्रेस के पास अपने अंतर्युध से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। बीजेपी के पास इतने महान दिमागी नेता नहीं हैं जितने कांग्रेस के पास बादशाही मिज़ाज वाले लीडर हैं। उन का हर नेता प्रधान मंत्री से कम नहीं है। कांग्रेस की राजनैतिक नैया ऐसे नेताओं के सहारे मंजधार में फंसती जा रही है जो एक एक कर के बीजेपी में शामिल हो रहे हैं।
 जिस वक़्त कांग्रेस को एक संजय गाँधी की ज़रूरत थी और राहुल गाँधी ने अपने आप को शहज़ादे के बचपने से निकालने कि कोशिश भी लेकिन वहां इतने बादशाह अकबर बैठे हुए हैं कि सलीम को मुहब्बत तो दूर की बात है इज़हार ए मुहब्बत भी नहीं करने दे सकते।
परिस्थिति इतनी असमंजस की हो गयी कि 2019 के चुनावी घोषणा पत्र के किसी पन्ने या लाइन में कांग्रेस मुसलमान शब्द का प्रयोग नहीं कर पायी जबकि अगर जातिगत विश्लेषण की द्रष्टि से बीते लोकसभा चुनाव का आंकलन किया जाये तो कांग्रेस के पास मुसलमानों से बड़ा सपोर्ट किसी दूसरी बिरादरी का नहीं था। 
बीजेपी के इस बयान को आज भी कांग्रेस सिद्ध करती हुई नज़र आ रही है कि कांग्रेस ने सदैव मुसलमानों को बीजेपी और आरएसएस से डरा कर उन का वोट हासिल करने की कोशिश की है और इस काम के लिए होल सेलर मुस्लिम क्लेर्जी और पेशावर मुस्लिम नेता का इस्तेमाल किया है। 

कांग्रेस के इन दलाल मोलवियों और नेताओं ने हर बार मुसलमानों का कांग्रेस के साथ सौदा किया। हालाँकि उन्हीं बिचौलिए दलालों ने राजीव गाँधी को बहला फुसला कर शाह बानो केस में कांग्रेस की नैया को डुबो भी दिया। क्यूंकि बाबरी मस्जिद पर ताला लगने के बाद उस का ताला खुलवाने में इन्हीं मोलवियों के मनगढ़ंत दलीलें थीं जिस ने कांग्रेस का सूरज तो डुबा ही दिया साथ ही मुसलमानों का भविष्य भी अंधकार के हवाले कर दिया।
आज भी कांग्रेस उन परिस्थितिओं से निकल नहीं पा रही है। अपने इर्द गिर्द के फरेबी जालों से बाहर झाँकने कि कोशिश नहीं कर रही है। 
आज जिस तरह मुसलमान अपने हम वतन भाइयों के साथ सड़कों पर है, गोलियां, लाठियां, और गालियाँ खा रहे हैं, बच्चे, बूढ़े, औरतें इस ठिठुरती ठण्ड में सडकों पर बैठी हैं, नौजवान जेलों में हैं, छात्र मुक़दमों की मार झेल रहे हैं, कांग्रेस पार्टी अभी भी सेफ ज़ोन से बाहर निकलने को तैयार नहीं। सपा और बसपा कि तरह दूर से हाथ बढ़ा रहे हैं।
 और इस आन्दोलन को कैश करने कि कोशिश भी कर रहे हैं। लेकिन खुल कर साथ देने को तैयार नहीं है।



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